अभि अभि तो आये हो….

अभि अभि तो आये हो,
नज़र भर देख लेने तो दो…
इतने मीठे हो,
दो बोल सुन लेने  तो दो

इतनी सारी सुंदरता हैं,
दिल में समा लेने तो दो….
कहीं नज़र न लग जाये,
अपने आँचल में छिपा लेने तो दो

इतने गुणों का भंडार हैं,
उसे लूट लेने तो दो…..
जो लूटा उसे  धारण कर,
अपने को श्रृंगारने तो दो

जिसे ज़िंदगी समझ कर जी रहे थे,
वहाँ से मर जाने तो दो….
हद से बेहद में आये हैं,
अपना नया घर बसा लेने तो दो

जिसे जनम जनम से पूजा था,
उसे प्यार कर लेने तो दो….
महफिल हैं शमा की,
परवाने को मिट जाने तो दो

जो रिश्ता आपने हमसे जोडा  हैं,
उसे निभा लेने तो दो….
जितना आप हमें चाहते हैं,
उस से ज्यादा आप को  चाह लेने तो दो

आप साजन हैं,
अपनी सजनी को सज जाने तो दो….
आप की याद में,
खुद को भूल जाने तो दो

आप से जो कुछ भी मिला हैं,
उस से आप समान बन जाने तो दो….
जो हम अभी दो हैं,
हमें एक हो जाने तो दो

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